बात सन् 1956 की है, दिल्ली गणतंत्र दिवस की सांस्कृतिक झांकी के लिए उत्तर प्रदेश की ओर से टिहरी गढ़वाल जिले की केदारनृत्य टीम का चयन हुआ था। इस 28 सदस्यों की टीम के निर्देशक इंद्रमणि बडोनी थे।। प्रसिद्ध लोक साधक शिवजनी के ढोल की ताल पर केदारनृत्य पर भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू भी नाच उठे थे। नेहरू ने तब पहाड़ी मिरजई पहन ली थी।नेहरू के आगे माला देवी और पीछे गज़ला देवी इनके अलावा टीम में दो और भी महिला कलाकार थी। सभी कलाकार टिहरी गढ़वाल जिले के भिल्लंगना विकासखण्ड के थे। दिल्ली में केदारनृत्य और सांस्कृतिक झांकी संबंधी कुछ फोटोग्राफ्स आज भी त्रिमूर्ति दिल्ली में उपलब्ध हैं। माला और गज़ला दो प्रसिद्ध नृत्यांगनाएं रही हैं। लगभग हम उम्र ही थी, हालांकि रिश्ते में सास-बहू लगती थी। माला बहू और गज़ला सास। 1956 में इनकी उम्र मात्र 17 या 18 वर्ष रही होगी। माला देवी का निधन 1991 और गज़ला देवी का 2021 में हुआ। टीम के ढोलवादक कलाकार 90 वर्षीय शिवजनी आज भी अपने गांव ढुंग बजियाल में रहते हैं।
नदी घाटी और पहाड़ समाचार पत्र मे आपका स्वागत । देखे पढ़े लिखे जन गण मन की आवाज। सूचना एक संवेदनशील तथ्य ।आपके आसपास के शब्दो की खबर -सम्पादक -शीशपाल सिंह रावत। जरोला-जामणीखाल टिहरीगढवाल उतराखंड भारत 249122
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नदी घाटी और पहाड़
1956 सांस्कृतिक झांकी तथ्य
बात सन् 1956 की है, दिल्ली गणतंत्र दिवस की सांस्कृतिक झांकी के लिए उत्तर प्रदेश की ओर से टिहरी गढ़वाल जिले की केदारनृत्य टीम का चयन हुआ था।...
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जय हो सनातन संस्कृति का पहला सम्बोधन है और देवी की स्तुति में जय हो एक मंत्र है। सम्पादक- नदी घाटी और पहाड़।

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