गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026

1956 सांस्कृतिक झांकी तथ्य

 बात सन् 1956 की है, दिल्ली गणतंत्र दिवस की सांस्कृतिक झांकी के लिए उत्तर प्रदेश की ओर से टिहरी गढ़वाल जिले की केदारनृत्य टीम का चयन हुआ था। इस 28 सदस्यों की टीम के निर्देशक इंद्रमणि बडोनी थे।। प्रसिद्ध लोक साधक शिवजनी के ढोल की ताल पर केदारनृत्य पर भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू भी नाच उठे थे। नेहरू ने तब पहाड़ी मिरजई पहन ली थी।नेहरू के आगे माला देवी और पीछे गज़ला देवी इनके अलावा टीम में दो और भी महिला कलाकार थी। सभी कलाकार टिहरी गढ़वाल जिले के भिल्लंगना विकासखण्ड के थे। दिल्ली में केदारनृत्य और सांस्कृतिक झांकी संबंधी कुछ फोटोग्राफ्स आज भी त्रिमूर्ति दिल्ली में उपलब्ध हैं। माला और गज़ला दो प्रसिद्ध नृत्यांगनाएं रही हैं। लगभग हम उम्र ही थी, हालांकि रिश्ते में सास-बहू लगती थी। माला बहू और गज़ला सास। 1956 में इनकी उम्र मात्र 17 या 18 वर्ष रही होगी। माला देवी का निधन 1991 और गज़ला देवी का 2021 में हुआ। टीम के ढोलवादक कलाकार 90 वर्षीय शिवजनी आज भी अपने गांव ढुंग बजियाल में रहते हैं।

मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026

तृतीय नवरात्र

 तृतीय नवरात्र चंद्र घण्टा के दिन गाँव की महिलाओं द्वारा गरबा कार्यक्रम तस्वीर तथ्य 13/10/26


सोमवार, 12 अक्टूबर 2026

शनिवार, 10 अक्टूबर 2026

गंगा स्नान

 शारदीय नवरात्र आज से आरम्भ होगे और पितृ आमावस्य समापन। गंगा स्नान देवप्रयाग जंहा से गंगा नाम आरम्भ तस्वीर तथ्य। 


सोमवार, 5 अक्टूबर 2026

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क

 प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना कागजों में जिस तरह दिखती है यदि उस तरह जमीन पर दिखा जाय तो लोग गाँव से पलायन नही कर सकेगें कारण जो सुविधायें शहरों में चलने के लिए एक अदद सड़क दिखती है यदि वह सड़क गाँव में ही दिख जाय तो सम्भव है पलायन पर कुछ हद तक अकुंश लग सकेगा तस्वीर तथ्य। 


रविवार, 4 अक्टूबर 2026

नदी घाटी और पहाड़ का लोगो

 नदी घाटी और पहाड़  डिजिटल मिडिया के लिए  लोगो स्वयं डिजाइन पाठकों की सेवा में आवलोकन । 


गुरुवार, 24 सितंबर 2026

आंदोलनकारी पहचान उतराखण्ड

 उतराखण्ड राज्य बने 26 साल पूरे होने जा रहे है पर नवम्बर 2000  से राज्य की सत्ता ने उतराखण्ड राज्य आंदोलनकारियों की पहचान के लिए जो नियम थोपे है उनका और कागज की औपचारिकताओ को पूरा करना उतराखण्ड राज्य आंदोलनकारी सम्मान पाना सबके लिए सहज नहीं हो सका पर राज्य सरकार ने अभी भी आंदोलनकारी पहिचान पत्र बनवाने के लिए प्रत्येक जिले में एक समिति बनवाई हुई है  से समुचित व्यवस्था राज्य के भीतर प्रत्येक परिवार से एक सदस्य को आंदोलनकारी पहिचान पत्र उपलब्ध करवाती जो कि सत्य है के लिए   ऐसा नियम न होना एक गम्भीर सवाल राज्य बनने के पीछे का सवाल अभी तक जन गण मन की आवाज आवाज ही है का सम्मान जरूरी ।  सम्पादक- नदी घाटी और पहाड़। 

मंगलवार, 22 सितंबर 2026

बकरा पालन

 पहाड़ में बकरा पालन व्यवसाय रोजगार के साथ  योग का एक सहज माध्यम।  सम्पादक- नदी घाटी और पहाड़। 


शुक्रवार, 18 सितंबर 2026

ढोल ढोली का सम्मान

 उतराखण्ड के टिहरी गढ़वाल जिले की खास पट्टी चंद्र वदनी के चरणों में ढोल ढोली का सम्मान की तस्वीर। सम्पादक- नदी घाटी और पहाड़। 


गुरुवार, 17 सितंबर 2026

अगहन का माह आरम्भ

 अगहन का माह आरम्भ हुआ खेत से अन्न  खलिहान में आकर भण्डारण के लिए एकत्र होता पहाड़ के गाँव पलायन से खाली खेत वंजर अगहन का माह याद दिलाता। सम्पादक- नदी घाटी और पहाड़। 

नदी घाटी और पहाड़

1956 सांस्कृतिक झांकी तथ्य

 बात सन् 1956 की है, दिल्ली गणतंत्र दिवस की सांस्कृतिक झांकी के लिए उत्तर प्रदेश की ओर से टिहरी गढ़वाल जिले की केदारनृत्य टीम का चयन हुआ था।...