गुरुवार, 15 जून 2023

घास के लिए लगती बंजर खेतों में आग

 गाँव में निवास करने वाले लोग कम है जिससे खेती बंजर , बंजर खेतों में लोग आग लगा देते कि अनाज नहीं तो घास ही सही, बंजर खेत से आग पास के जंगल में उड़नछू हो जाती जिससे जंगल के जीव जन्तु पशु पक्षी आग की भेंट चढ जाते जबकि उनका इस समय प्रजनन काल भी रहता से जीव जन्तु पशु पक्षी का आने वाला बचपन भी भस्म हो जाता जिसका सीधा प्रभाव जलवायु परिवर्तन पर एक गम्भीर सवाल समुची  दुनिया के लिए। 

बुधवार, 31 मई 2023

नदी घाटी और पहाड़ प्रिंट मीडिया


 

निराश्रित पशु धन का आश्रयस्थल जामणीखाल

 माँ चंद्र बदनी के चरणों में ग्रामीण बाजार जामणीखाल है इस बाजार में निराश्रित पशु धन का आश्रय स्थल है जिनके लिए पानी की  कोई वयस्था नहीं भोजन के लिए इधर उधर से चर कर आ जाते अपनी  पेट की भूख मिटा लेते लेकिन धूप बरसात आंधी के समय जाये कंहा समुचित सरकार गौधन के लिए  व्यवस्था करें तो मूक पशुओं के प्रति मनुष्यता दिखेगी। 


शनिवार, 27 मई 2023

काफल पाको जेठ

 उतराखंड के खासपटटी चंद्र कूट पहाड़ के जंगलों में जेठ माह में काफल पकने लग गया परंतु जेठ माह भंयकर अंधड़ बेसमय बारीष ओले के प्रकोप से अतिक्रमण होता जा रहा काफल उस तरह पेड़ पर लकदक नहीं दिख रहा जिस तरह  दिखना चाहिए था जलवायु परिवर्तन के प्रति गम्भीर सवाल  । 


सोमवार, 22 मई 2023

उजाड़ होती सृजित संपत्ति

  1986-87 में एक शिशु मंदिर की स्थापना जामणीखाल में हुई समुचित सरकार और समुचित व्यवस्था तथा समिति और जनता के चन्दे से संपत्ति सृजित तो हुई  परन्तु  आज इस भवन पर न शिक्षक और न शिक्षा ग्रहण करने वाले, उजाड़ हो चुके इस



भवन पर लोगों के द्वारा छोड़े गए निराश्रित पशु थोड़ी देर के लिए ही सही  विश्राम |

मंगलवार, 16 मई 2023

कलेउ लेता किसान

 पहाड़ की संस्कृति अभी भी जिवित है भले ही इस संस्कृति को जिवितता बनाये रखने वाले कुछ गिनती के लोग  क्यों न हो


लेकिन है खेत में हल लगाने के बाद कलेउ लेता किसान

मंगलवार, 28 मार्च 2023

कांतेश्वर जलधारा

 ग्राम नागचौंड के नागेश्वर महादेव से  लगभग 300 मीटर उपर कांतेश्वर जलधारा है और  मंदिर के पास 50 मीटर दूरी पर मांतेश्वर जलधारा है  सतयुग में इस जलधारा के उपर हिमालय था जो अब बदरीनारायण से भी आगे दिखाई देता इस जलधारा का जल नागेश्वर महादेव को  9 कुण्डो से प्रवाहित होता था  पर आज भी इस जलधारा का जल स्वत ही गंगा जलधारा है इसी जलधारा से भोगवती नदी निकलती है जो  गाँव जरोला होकर पलेठी वनगढ होकर भागीरथी नदी में मिलती आज बरसाती गधेरा  दिखती कांतेश्वर मांतेश्वर महादेव चंपावत में है और  कांतेश्वर मांतेश्वर जलधारा खासपटटी के नागचौंड गाँव के नागेश्वर महादेव के आसपास |


उत्तराखंड टोपी

 


नदी घाटी और पहाड़

आंदोलनकारी पहचान उतराखण्ड

 उतराखण्ड राज्य बने 26 साल पूरे होने जा रहे है पर नवम्बर 2000  से राज्य की सत्ता ने उतराखण्ड राज्य आंदोलनकारियों की पहचान के लिए जो नियम थोप...